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बच्चों को वित्तीय जागरूक कैसे बनाएं

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हाल ही में, मैंने अपने सात वर्ष के बेटे और उसके पक्के दोस्त को मॉर्गेज के बारे में बात करते सुना।

‘लोगों को मॉर्गेज की ज़रूरत होती है क्योंकि घर खरीदने के लिए उनके पास पूरा पैसा नहीं होता।’ उसने कहा।

‘घर खरीदने में बहुत पैसा लगता है।’ उसके दोस्त ने कहा।

‘हां,’ मेरे बेटे ने कहा, ‘एक घर खरीदने में हजार डॉलर लग सकते हैं।’

मैं चकित रह गई। मुझे इस बात पर गर्व भी हुआ कि मेरा बेटा वे वित्तीय बातें समझने लगा है जो मैं उसे बताने की कोशिश करती रहती थी, और कुछ आश्चर्य भी हुआ कि अभी तो उसे बहुत कुछ सीखना बाकी है। ज्यादातर अभिभावकों की तरह, मैं भी अपने बच्चों को वित्तीय जागरूक बनाना चाहती हूं।

तो, इस बारे में मैंने तीन विशेषज्ञों से बात की कि बच्चों को पैसे के बारे में किस तरह सिखाया जाए।

 

बातचीत व्यावहारिक बनाएं: हर बार जब हम अपने बटुए निकालते हैं (या निकालने से बचते हैं), तो हम बच्चों को हमारे मूल्यों के बारे में कुछ न कुछ सिखाते हैं। और वे इसे ध्यान से देखते हैं। तो, पैसे के बारे में अपने बच्चों से बात करने से पहले यह पक्का कर लें कि आपके कार्य आपके मूल्यों के अनुरूप हों, ऐसा सुरी, बी.सी. में नेशनल बैंक में शेफेल्ट मैकमिलन ग्रुप की वित्तीय सलाहकार और दो बच्चों की मां कैरोलीन हैना ने बताया।

मेरे परिवार में, उदाहरण के लिए, हम शिक्षा को महत्त्व देते हैं। इसलिए मैंने अपने बच्चों को आरईएसपी के बारे में समझाया और यह बताया कि किस तरह से उनके दादा-दादी और मैं हर महीने उनकी शिक्षा के फंड में योगदान करते हैं।

 

इस बारे में बात करें: निवेश मैनेजर टी. रोव प्राइस के एक सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 28% अभिभावक अपने बच्चों को पैसे के बारे में बताते हैं, ज्यादातर इसलिए नहीं बताते क्योंकि वे अपने बच्चों को चिंतित नहीं करना चाहते।

लेकिन जब हम वित्तीय मामलों में चुप बने रहते हैं तो हम बच्चों को शायद यह सिखा देते हैं कि पैसे के बारे में बात करना खतरनाक या डरावना हो सकता है, ऐसा ग्लेन करलैंडर ने बताया, जो चार बच्चों के पिता हैं और पर्चेज एनवाई में मोर्गन स्टैनले में फैमिली गवर्नेंस एंड डायनेमिक्स और वेल्थ प्लॉनिंग सेंटर्स के हेड हैं। और यह संपदा से स्वस्थ संबंध विकसित करने का कोई अच्छा तरीका नहीं है।

लेकिन हमें उनको कितना बताना चाहिए? पैसे को लेकर कोई सवाल अनुचित नहीं होता, बस कुछ सवालों के लिए वक्त सही नहीं हो सकता है।’ ऐसा एक पिता और न्यूयार्क टाइम्स में वित्तीय कॉलम लिखने वाले रॉन लाइबेर ने बताया।

तो, बच्चों को इस सवाल का जवाब दें कि ‘मम्मी, आप अपनी जॉब में कितना पैसा कमाती हैं?’ यह खाने की मेज पर सभी लोगों के बीच पूछा जाने वाला सवाल नहीं है। इस तरह की बातों पर गोपनीय रूप से, निकट पारिवारिक सदस्यों के बीच ही चर्चा की जानी चाहिए।

फिर भी, हमारे बच्चों को हमारी आमदनियों के बारे में बताने का विचार कुछ अभिभावकों को असहज कर सकता है। पहले खर्चों के बारे में बात करें, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। गैसोलीन या किराने की कीमतों पर बात करें और यह भी कि ये किस तरह से परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। और डिनर टेबल पर उस कार के बारे में बात करें जो आप खरीदने पर विचार कर रहे हैं, उसकी लागत कितनी होगी और 0 प्रतिशत फाइनेंसिंग का वास्तव में क्या मतलब होता है।

बच्चों को उपयोगी सेवाओं के बिल दिखाएं, और समझाएं कि घर चलाने के लिए कितना खर्च करना पड़ता है। यह भी चर्चा करें कि उनके दादा-दादी किस तरह से उनकी सपोर्ट करते हैं, हालांकि वे अब काम नहीं करते, और यह भी कि किस तरह से आपको रिटायरमेन्ट के लिए भी आमदनी का एक हिस्सा अलग जमा करना पड़ता है।

उनको भत्ता दें, और बताएं कि यह किसलिए है। ‘भत्ता प्रैक्टिस के लिए है।’ लाइबेर का कहना है, ‘यह घरेलू कामकाज करने के एवज में कोई मजदूरी या पुरस्कार नहीं है।’ और बच्चे किसकी प्रैक्टिस कर रहे हैं? वे पैसे के तीन प्रमुख फंक्शन सीख रहे हैं: खर्च करना, बचत करना, और दान देना, ऐसा करलैंडर ने बताया।

आप और आपके बच्चों को मिलकर यह तय करना चाहिए कि उनके भत्ते से कौन सा खर्च कवर किया जाएगा, इसका कितना भाग उनको बचाना होगा, और कितना भाग, यदि कोई हो, चैरिटी के लिए अलग करना होगा। समय के साथ, ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारियां और खर्चे, बड़े होते बच्चों को सौंपते जाएं। और तब, जैसा कि हैना का कहना है, अगर वे सही तरह से प्रबंधित न कर पाएं, तो उनको सहायता मत दें।’

उदाहरण के लिए, यदि आपके बच्चे को अपने दोस्त के लिए बर्थडे का उपहार खरीदना है लेकिन वह अपना सारा पैसा खर्च कर चुका है, तो उसे बताएं, ‘मुझे लगता है कि तुम्हें कुछ करना होगा, या कुछ अतिरिक्त धन कमाने का तरीका खोजना होगा।’ ये गलतियां, बड़े अवसर लेकर आती हैं, ऐसा उनका कहना है, जिनसे बच्चे ज्यादा अक्लमंदी से वित्तीय फैसले करना सीखते हैं।

 

बड़े होते बच्चों को ज्यादा बताते जाएं: बड़े होते बच्चों को परिवार के वित्तीय मामलों से अच्छी तरह परिचित कराना, अभिभावकों की जिम्मेदारी होती है, ऐसा लाइबेर का कहना है, ‘लेकिन जब तक वे तैयार न हो जाएं, तब तक नहीं।’ तो, जब तक वे अपने भत्ते की बजटिंग करने का अभ्यास कर रहे हैं तब तक इंतजार करें और जब वे घरेलू बजट को भलीभांति समझने लगें तभी उनको ज्यादा बताएं।

जब करलैंडर के बच्चे किशोर उम्र में थे, तो उन्होंने उनको अपने मासिक क्रेडिट कार्ड ब्यौरे दिखाने शुरू कर दिए। घरेलू खर्चों के बारे में उनको व्यापक जानकारी देने और हर महीने कार्ड का बैलेंस चुकता करने का महत्त्व समझाने के लिए यह बड़ा अवसर था, उन्होंने बताया।

याद रखें, हैना का कहना है, आज के बड़े बच्चे तकनीक-कुशल होते हैं। बड़ा बच्चा कैरियर या रियल एस्टेट की साइटों पर ऑनलाइन जाकर अपने अभिभावकों की आमदनी, या खुले बाज़ार में अपने घर की कीमत के बारे में जान सकता है। इसलिए, उसे आंकड़ों के मामले में कुछ संदर्भ बताएं।

उनको शामिल करें: करलैंडर का कहना है कि अपने बच्चों को केवल यह न बताएं कि आप अपने पैसे का क्या कर रहे हैं, बल्कि फैसलों में उनको सक्रिय भागीदार बनाएं। मिलकर पारिवारिक चैरिटी करें। अपने किशोर बच्चों को अगले फैमिली कम्प्यूटर के सर्वोत्तम विकल्पों और कीमतों के बारे में खोजबीन करने की जिम्मेदारी सौंपें।

लाइबेर का कहना है कि बड़े बच्चों को जॉब करनी चाहिए-सर्विस इंडस्ट्री में ज्यादा ठीक है। क्योंकि यह लाभप्रद है, यह उनको टीम का हिस्सा बनकर काम करना सीखने का मौका देती है, प्रायः ऐसे लोगों के साथ जिनसे उनका सामना और कहीं नहीं हो सकता।

और यह सुनिश्चित करें कि बच्चे अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का कुछ खर्च निकालें। 18 साल के बच्चे से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह अपनी पढ़ाई का कुछ खर्च निकाले, ताकि वह इसे गंभीरता से ले, ऐसा उन्होंने आगे बताया।